Monday, 2 June 2014

कनेर का फूल - (पौधा, पत्तियां ,छाल, बीज और जड़ विषैली )


कनेर का फूल - (पौधा, पत्तियां ,छाल, बीज और जड़ विषैली )

कनेर का फूल मशहूर फूलों मंे से एक है जो गर्मियों के मौसम में ही खिलते हैं । कनेर की चार प्रजातियां सफेद, लाल, गुलाबी और पीली हैं । सफेद कनेर औषधि के उपयोग में बहुत आता है । कनेर के पेड़ को कुरेदने या तोड़ने से दूध निकलता है । कनेर के पेड़ के बारे में कहा जाता है कि सांप इसके पेड़ के आस पास भी नहीं आता है । कनेर को जानवर नहीं खाते हैं इसलिये सड़क मार्ग पर शोभा हेतु बहुतायत से लगाया जाता है । सफेद और लाल फूल वाली देशी कनेर को औषधि (विष से दवा ) के रूप में अधिक उपयोगी होती है । सफेद कनेर के फूल और जड़ को पीस कर पिलाने से सर्पदंश में लाभ होता है । गणपति की आराधना के लिए लाल कनेर अर्पित किये जाते हैं साथ में दूब भी । लाल कनेर में बुद्धि-बल को विकसित करने के तत्व हैं । लाल कनेर की छाल से त्वचा रोग की औषधियां बनायी जाती हैं । 
पीली कनेर - इसमेें पीले फूल लगते हैं तथा पत्तियों लम्बी व पतली होती हैं । पीली कनेर का दूध विषैला होता है और अधिकतर औषधि बनाने के लिए उपयोग किया  जाता है । कनेर के बीज में जहर डाइगाक्सीन होता है जो दिल की धड़कन को कम करता है । भगवान शिव जी की कनेर के फूलों से पूजा करने से भक्त को सुन्दर वस्त्रों की इच्छा को पूरा करती है ।
कनेर (थिविलिया प्रवेनिया) सफेद कनेर के फूल का  प्रयोग फेशियल एवं उबटन के रूप किया जाता है । कनेर के फूल को बेहद पवित्र माना जाता है । इसलिए यह आज भी विभिन्न धार्मिक स्ािलों में बहुतायत में पाया जाता है । वैसे तो कनेर का संपूर्ण पौधा विष युक्त होता है । इसके फल, मूल एवं बीज में  ग्लाइकोसाइडो, नेरिओडोरिन एवं कैरोबिन , स्कापोलिन पाया जाता है । कनेर के पीले फूलों में पेरूबोसाइड भी होता है । 
डाॅ. माइकल एडलेस्टन (श्री लंका)  का कहना है कि कनेर का एक बीज जान लेने के लिए काफी है । कनेर का  जहर डाइगाक्सीन ड्रग की तरह है । डाइगाक्सीन दिल की धड़कन की रतार कम करता है । कनेर का एक बीज डाइगाक्सीन के सौ टेबलेट के बराबर होता है । पहले तो यह दिल की धड़कन को धीमा करता है और आखिरकार एकदम रोक देता है । डाइगाक्सीन के जहर के खिलाफ एंटीडाइगाक्सीन का उपयोग नहीं किया जाता क्योंकि यह महंगा है इस पर करीब तीन हजार डालर का खर्च आता है ।
.सफेद एवं लाल कनेर की पत्तियों का काढ़ा बनाकर घाव धोने से यह जल्दी भर जाता है । इसके पत्ते को पीस कर तेल में मिलाकर लेप करने से जोड़ों का दर्द दूर होता है । कनेर के पत्तों से सिद्ध तेल खुजली के लिए बनाया जाता है जो बहुत फायदेमंद होता है । श्रावण सोमवार में शिव जी को प्रसन्न करने के लिए मेष व वृश्चिक राशि वाले 109 बार करने के गुलाबी या लाल फूलों को चढ़ाते हुए मंत्र का जाप करें । 









   

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